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महिला डॉक्टर की मौत पर साकेत गोखले का वार: BJP सरकार दबा रही है सच, NCW और जांच दल गायब क्यों?

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नई दिल्ली/ कोलकाता/ मुंबई 29 अक्टूबर 2025

महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में एक 26 वर्षीय महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले ने देशभर में सवाल खड़े कर दिए हैं। चार पन्नों के सुसाइड नोट में डॉक्टर ने लिखा था कि उसे एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा चार बार बलात्कार का शिकार बनाया गया। इसके साथ ही उसने आरोप लगाया कि एक सांसद उस पर दबाव बना रहा था कि वह फर्जी मेडिकल रिपोर्ट जारी करे। यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद साकेत गोखले ने इस मामले पर केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “यह देखकर हैरानी होती है कि महाराष्ट्र में एक युवा डॉक्टर के बलात्कार और रहस्यमय मौत पर देशभर में सन्नाटा पसरा है। डॉक्टर ने आत्महत्या की क्योंकि उसे बार-बार एक पुलिस अधिकारी द्वारा बलात्कार झेलना पड़ा। यह भी आरोप है कि एक सांसद (जिसकी पार्टी का नाम नहीं बताया गया, लेकिन समझिए कौन सी) ने उसे झूठी मेडिकल रिपोर्ट देने के लिए मजबूर किया।”

साकेत गोखले ने अपने बयान में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों पर निशाना साधते हुए लिखा, महिला आयोग कहाँ है? जो अगर यह मामला बंगाल का होता तो तुरंत वहाँ पहुँच जाता। BJP का ‘फैक्ट-फाइंडिंग डेलिगेशन’ कहाँ है, जो हर विपक्ष शासित राज्य में भेजा जाता है?”

उन्होंने आरोप लगाया कि यह “बेहद गंभीर और रहस्यमय मामला” है, जिसे महाराष्ट्र की BJP सरकार दबाने की कोशिश कर रही है। गोखले ने कहा कि ऐसे मामलों में केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल का “चुनिंदा आक्रोश” दिखाता है कि महिलाओं की सुरक्षा पर राजनीतिक दोहरापन किस हद तक बढ़ गया है।

इस मामले में अब तक पुलिस ने जांच शुरू की है, लेकिन पीड़िता के सुसाइड नोट में दर्ज सांसद और पुलिस अधिकारी के नामों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। डॉक्टर फालतन उप-जिला अस्पताल में कार्यरत थीं और बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी हथेली पर “चार बार रेप” लिखने के बाद आत्महत्या की।

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं। डॉक्टर संघों और महिला संगठनों ने मांग की है कि सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर विशेष अदालत में सुनवाई की जाए।

राजनीतिक रूप से यह मामला न केवल महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी गर्माने लगा है। विपक्ष का आरोप है कि BJP शासित राज्यों में ऐसे मामलों को “राजनीतिक शर्मिंदगी से बचने के लिए” दबा दिया जाता है, जबकि वही दल अन्य राज्यों में “नैतिकता की राजनीति” करता है।

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