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श्रीनगर पुलिस का आतंक तंत्र पर करारा वार: UAPA जांच के तहत सघन छापेमारी, सहयोगियों की कमर तोड़ने की रणनीति तेज़

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जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ देखा गया है, जहां पुलिस ने UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत जारी जांच में आतंकवाद से जुड़े सहयोगियों के विरुद्ध एक बड़े स्तर पर कार्रवाई तेज़ कर दी है। यह सघन अभियान घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने और उनके सहयोगियों को न्याय के कटघरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष छापेमारी
श्रीनगर पुलिस ने पिछले कुछ दिनों में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में शहर के विभिन्न हिस्सों में संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया के तहत छापेमारी अभियान चलाया। हर छापेमारी कार्यकारी मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में की गई, जिससे पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन सुनिश्चित हो सके।
पुलिस का उद्देश्य इन तलाशी अभियानों के जरिए हथियार, गोला-बारूद, डिजिटल डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज जब्त करना था, जो जांच में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किए जा सकें और खुफिया तंत्र को मजबूती दे सकें।
कई गंभीर मामलों से जुड़े नामों पर कार्रवाई
इस व्यापक अभियान में जिन संदिग्धों के ठिकानों पर छापे मारे गए, वे कई पुराने और हालिया एफआईआर में नामजद हैं। इनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
संदिग्ध व्यक्तियों की सूची (UAPA जांच से संबंधित):
1. नूर मोहम्मद शेख (कनीमजार) – FIR No. 156/2023
2. वसीम तारिक मट्टा (रामपोरा) – FIR No. 46/2023
3. अंजुम यूनिस (केनिहामा, थाना नौगाम) – 2021 मामला; IPC, Arms Act और UAPA के तहत
4. बिलाल अहमद लोन उर्फ चुन्नीन (सईदपोरा ईदगाह) – FIR No. 51/2021 एवं 2016 का मामला
5. फैज़याब शोकत देवानी (पात्र मस्जिद, जैनकदल) – FIR No. 35/2022
6. मंज़ूर टोला (खानसोकता) – पूर्व आतंकी, FIR No. 156/2023 में नामजद
7. मो. अयूब डार और मुश्ताक अहमद बचून – FIR No. 31/2024
8. ज़हूर अहमद भट (कुपवाड़ा निवासी, वर्तमान में हवाल में) – FIR No. 31/2024
9. फिरदौस अहमद डार (इब्राहिम कॉलोनी) – FIR No. 46/2023 से संबद्ध
आतंक समर्थकों पर कानून का शिकंजा
श्रीनगर पुलिस के प्रवक्ता ने कहा, “यह कार्रवाई घाटी में मौजूद आतंकवाद के आधारभूत ढांचे को कमजोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। जो भी व्यक्ति शांति और सुरक्षा को खतरे में डालता है या आतंकवादियों की मदद करता है, उसे कानून का सामना करना पड़ेगा।”
पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समर्थन देने वालों पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य न केवल मौजूदा आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करना है, बल्कि संभावित सहयोगियों को भी स्पष्ट संदेश देना है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय स्थिरता का संतुलन
यह छापेमारी अभियान जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बलों के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें राष्ट्र की सुरक्षा और स्थानीय शांति व्यवस्था दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है। पुलिस का मानना है कि सहयोगियों की सक्रियता ही आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार करती है, और जब तक इस सहयोग नेटवर्क पर चोट नहीं की जाएगी, तब तक आतंक का समूल नाश संभव नहीं।
 जीरो टॉलरेंस की नीति पर कड़ा अमल
13 मई 2025 की यह कार्रवाई न केवल कानूनी रूप से सुसंगत रही, बल्कि यह स्पष्ट संकेत है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस अब जीरो टॉलरेंस नीति पर पूरी मजबूती से अमल कर रही है। इस अभियान ने आतंकी नेटवर्क की नींव हिला दी है, और यह दिखा दिया है कि भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था सतर्क भी है और सक्षम भी।
आतंक के खिलाफ यह कार्रवाई केवल एक पुलिस ऑपरेशन नहीं, बल्कि आने वाले समय में स्थायी शांति की बुनियाद रखने वाली रणनीति का हिस्सा है।
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