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जम्मू-कश्मीर को फिर मिलेगा राज्य का दर्जा: अमित शाह ने दोहराया वादा, समयसीमा पर अब भी मौन

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गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार रात (28 मार्च 2025) आयोजित एक राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा “जैसा वादा किया गया था, जरूर बहाल किया जाएगा”, हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा बताने से परहेज़ किया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर राजनीतिक पुनर्गठन के बाद एक निर्णायक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित किए जाने के बाद यह सबसे बड़ा राजनीतिक आश्वासन है जिसे सार्वजनिक रूप से फिर दोहराया गया है।
“हमने जो कहा, वो निभाएंगे, लेकिन समय बताना उचित नहीं”: शाह
शाह ने कहा, “हमने यह आश्वासन पहले ही दे रखा है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा। यह हमारी नीति का हिस्सा है और इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन इस मंच पर यह बताना संभव नहीं कि कब दिया जाएगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल करना सरकार के एजेंडे में शामिल है, लेकिन इसके लिए “सही समय” का इंतजार करना होगा।
लोकतांत्रिक बदलाव का प्रमाण: “बिना गोली, बिना आंसू गैस, शांतिपूर्ण चुनाव”
अमित शाह ने 2024 में जम्मू-कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि “यह पिछले 40 वर्षों में पहला चुनाव था जिसमें न तो दोबारा मतदान की जरूरत पड़ी, न ही किसी स्थान पर गोली चलानी पड़ी या आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा।” उन्होंने बताया कि लगभग 60% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो एक अभूतपूर्व परिवर्तन का संकेत है।
शाह के अनुसार, यह शांतिपूर्ण चुनाव और व्यापक जनसहभागिता इस बात का प्रमाण है कि घाटी में सामान्य स्थिति की वापसी हो चुकी है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं फिर से मजबूत हो रही हैं।
2019 के संसद वादे की पुनर्पुष्टि
जब 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लागू किया गया था, उस समय संसद में अमित शाह ने साफ कहा था कि “राज्य का दर्जा अस्थायी रूप से हटाया गया है और उपयुक्त समय पर इसे पुनः बहाल किया जाएगा।” अब 2025 में इस आश्वासन को फिर से दोहराया जाना केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है — हालांकि इसका समय अभी भी अज्ञात है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और जनभावना
इस बयान के बाद क्षेत्रीय दलों और नागरिक समाज के कुछ वर्गों ने आशावाद जताया है, लेकिन साथ ही समयसीमा की अस्पष्टता को लेकर चिंता भी जताई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे दल लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य का दर्जा बहाल करना केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पहचान, आत्मसम्मान और प्रशासनिक स्थायित्व से जुड़ा विषय है।
गृह मंत्री अमित शाह का यह बयान निश्चित ही जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य को लेकर आश्वस्त करने वाला है। हालांकि समय की घोषणा न होना लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ा रहा है। परंतु जिस प्रकार शांतिपूर्ण चुनाव, सुरक्षा की बहाली और लोकतांत्रिक पुनर्निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, उससे यह उम्मीद प्रबल हो गई है कि राज्य का गौरव — “राज्य का दर्जा” — बहुत दूर नहीं।
अब सबकी निगाहें उस “उपयुक्त समय” पर टिकी हैं जिसका संकेत शाह ने दिया, लेकिन जिसकी तारीख अभी रहस्य बनी हुई है।
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