अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो 25 अक्टूबर 2025
इटली में Rete l’Abuso नामक पीड़ितों की सर्वश्रेष्ठ संस्था द्वारा जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में लगभग 4,395 लोगों – जिनमें अधिकांश 18 वर्ष से कम उम्र के पुरुष बच्चे थे – को कथित रूप से कैथोलिक पादरियों व चर्च-संबंधित कर्मियों द्वारा यौन शोषण का शिकार होना पड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुल 4,625 पीड़ितों का लेखा-जोखा बनाया गया है, जिसमें से 4,395 का आरोप पादरियों पर है। यह आंकड़ा 1,106 कथित अपराधी पादरियों और अन्य चर्च-संबंधित व्यक्तियों को संदिग्ध के रूप में चिन्हित करता है।
पीड़ितों का विवरण और कालक्रम स्पष्ट नहीं है कि ये सभी मामलों में कब से कब तक हुआ। लेकिन यह संकेत मिलता है कि यह समस्या हाल-ही में शुरू नहीं बल्कि वर्षों पुरानी है और अब तक पर्याप्त रूप से सार्वजनिक अथवा चर्च-स्तर पर जवाबदेह नहीं बन पाई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस विशाल संख्या में से मात्र 76 पादरियों के विरुद्ध चर्च-आंतरिक सुनवाई हुई है, 17 को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है, 7 को अन्य पल्लियों में स्थानांतरित किया गया और 18 को पादरीपद से हटाया गया या त्याग-पत्र दे दिया गया।
इसके अलावा, Italian Bishops’ Conference (CEI) द्वारा 226 आधारित धर्मप्रांतों (डायोसेज) में से 81 ने ही उस प्रश्नावली का उत्तर दिया था जिसे Vatican Commission for the Protection of Minors ने सुरक्षा-प्रणाली (safeguarding practices) की जांच के लिए जारी किया था।
विश्लेषकों का कहना है कि यह संख्या उन मामलों का सिर्फ़ “आम” अनुमान है जो उजागर हुए हैं; अज्ञान, शर्म-सिखरिया, शक्ति-असंतुलन व चर्च-संस्थानिक जटिलताओं के कारण अनगिनत अन्य मामले दबे-छुपे रह सकते हैं।
राजनीतिक व सामाजिक असर:
इस खुलासे ने केवल चर्च के अंदरूनी मसले को उजागर नहीं किया है बल्कि यह इटली और वैश्विक तौर पर कैथोलिक चर्च की जवाबदेही व पारदर्शिता की कमी पर गहरा सवाल खड़ा कर रहा है। ऐसे समय में जब चर्च का सामाजिक-नैतिक आचरण, बच्चों-वयस्कों की सुरक्षा व विश्वास-प्रणाली सार्वजनिक संवाद का विषय बन चुकी है, यह आंकड़ा चर्च-प्रभावित देशों में एक नया मोलक मोड़ लेकर आया है।
विशेष रूप से, इटली में यह मुद्दा इसलिए संवेदनशील है क्योंकि वहाँ चर्च और राज्य के बीच गहरा जुड़ाव है और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से चर्च का प्रभाव व्यापक है। ऐसी परिस्थिति में, बच्चों-युवा सम्बन्धी सुरक्षा और शासन-प्रक्रिया की कमी सामाजिक तंत्र को भी चुनौती देती है।
आगे क्या होगा:
रिपोर्ट ने इस बात पर बल दिया है कि पादरियों द्वारा शोषण के आरोपों की सुनवाई, पीड़ितों को न्यायमूलक सहायता, चर्च-डाउनलाइन संरचनाओं में निगरानी व जवाबदेही बढ़ाने की तत्काल जरूरत है। इसके अलावा, चर्च को यह सुनिश्चित करना होगा कि शोषण के आरोपों की नियमित सार्वजनिक अनुवीक्षण हो, आंतरिक जांच स्वतंत्र हो और आखिर में न्याय-प्रक्रिया में पारदर्शिता हो।
अगर यह नहीं हुआ, तो यह न केवल चर्च-की छवि सामाजिक-सामूहिक विश्वास को भी झटका देगा। पीड़ितों की आवाज़ अब जोर-शोर से उठ रही है — और अब समय है कि चर्च, राज्य, सामाजिक संस्थाएँ मिलकर इस समस्या को जड़ से समझें और आगे की राह तय करें।




