पटना, 17 अक्टूबर 2025
बिहार की राजनीति शुक्रवार सुबह तक नई करवट ले सकती है। पहले चरण के नामांकन की आखिरी तारीख आज है और इसी के साथ महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, राजद और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है, जबकि कांग्रेस भी देर रात तक चली बैठकों के बाद नरम रुख अपनाने को तैयार दिख रही है।
राजद का बड़ा कदम — मुकेश सहनी को मनाने में जुटा पूरा नेतृत्व
तेजस्वी यादव की अगुवाई में राजद नेतृत्व ने बीती रात वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी से लंबी बातचीत की। सूत्रों का कहना है कि सहनी को कम से कम दो सीटें देने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि गठबंधन में ‘निषाद वोट बैंक’ को एकजुट रखा जा सके। तेजस्वी ने खुद यह संकेत दिया है कि “सभी साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे, कोई बाहर नहीं रहेगा।” इस बयान के बाद राजद खेमे में सकारात्मक माहौल है।
कांग्रेस ने दिखाई नरमी, सीट बंटवारे पर अंतिम ड्राफ्ट तैयार
कांग्रेस जो अब तक अपने हिस्से में किसी भी कटौती को लेकर सख्त थी, अब व्यावहारिक रुख अपनाने लगी है। देर रात प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई बैठक में दिल्ली से जुड़े पर्यवेक्षकों और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष ने स्थिति का जायज़ा लिया। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने संकेत दिया है कि “गठबंधन की एकता सबसे ऊपर है,” और अगर सहनी को जोड़ना रणनीतिक दृष्टि से ज़रूरी है, तो कुछ सीटों पर समायोजन संभव है।
सुबह तक अंतिम घोषणा की संभावना
राजद और कांग्रेस के बीच सीटों की अंतिम सूची पर सहमति बनाने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह 9 बजे तक यह घोषणा की जा सकती है। इसके बाद गठबंधन के उम्मीदवार नामांकन के लिए रवाना होंगे। तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी और कांग्रेस नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की भी संभावना जताई जा रही है।
एनडीए की नजर विपक्षी उलझन पर
इधर एनडीए खेमे में भी महागठबंधन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। भाजपा और जदयू दोनों मानते हैं कि अगर विपक्ष में किसी भी तरह की असहमति या देरी होती है, तो पहले चरण की 49 सीटों पर उन्हें सीधा लाभ मिल सकता है। भाजपा के एक वरिष्ठ रणनीतिकार ने कहा, “महागठबंधन को हर बार सीट शेयरिंग में देरी भारी पड़ती है, और इस बार भी हालात अलग नहीं लग रहे।”
राजनीतिक तापमान चरम पर
बिहार की राजनीति इस वक्त चरम पर है। हर पार्टी अपनी रणनीति के आखिरी पत्ते खोल रही है। ऐसे में सबकी निगाहें शुक्रवार सुबह पर टिकी हैं — जब यह तय होगा कि क्या महागठबंधन एकजुट होकर मैदान में उतरेगा या मतभेद आखिरी वक्त तक बनी रहेंगे।
नामांकन का दिन बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। अगर सुबह तक सहमति बन जाती है तो यह तेजस्वी यादव की राजनीतिक सूझबूझ की जीत मानी जाएगी। लेकिन अगर आखिरी पल में कोई गड़बड़ी हुई, तो इसका फायदा सीधा एनडीए को मिलेगा। आज की सुबह तय करेगी कि बिहार की सियासत किस दिशा में जाएगी — गठबंधन की मजबूती या मतभेद की दरार।




