Home » International » पांच प्रांत, एक कमान — तालिबान ने पाकिस्तान को घेरा, मुल्ला उमर के बेटे ने खोला युद्ध मोर्चा

पांच प्रांत, एक कमान — तालिबान ने पाकिस्तान को घेरा, मुल्ला उमर के बेटे ने खोला युद्ध मोर्चा

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

काबुल 12 अक्टूबर 2025

पांच प्रांतों से घेरा पाकिस्तान — तालिबान का coordinated हमला

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराना तनाव अब एक पूर्ण सैन्य संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है। नवीनतम और बेहद गंभीर खबर यह है कि तालिबान ने पाकिस्तान की सीमावर्ती चौकियों पर एक समन्वित (Coordinated) सैन्य हमला शुरू कर दिया है, जिसे पाँच अफगान प्रांतों — नंगरहार, कुनार, पकतिका, खोस्त, और नूरिस्तान — से एक साथ अंजाम दिया गया है। ये सभी इलाके पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए हैं, और इन्हीं सीमावर्ती क्षेत्रों के पार से तालिबान के लड़ाकों ने भारी हथियारों, रॉकेट लांचर्स और मशीन गनों का प्रयोग करते हुए भीषण गोलाबारी की है। कहा जा रहा है कि मुल्ला उमर के बेटे ने कमान संभाली हुई है। 

यह व्यापक हमला पाकिस्तान द्वारा अफगान सीमा क्षेत्र पर की गई हालिया एयरस्ट्राइक के सीधे जवाब में किया गया है, जिसमें कई तालिबान कमांडर और नागरिक हताहत हुए थे। अफगान सैन्य और खुफिया सूत्रों का साफ कहना है कि “अब तालिबान केवल बचाव नहीं करेगा, बल्कि करारा जवाब देगा — और यह जवाब किसी भी तरह से सीमित नहीं होगा।” इस अचानक और बड़े हमले ने सीमा पर स्थिति को अत्यधिक विस्फोटक बना दिया है।

मुल्ला उमर के बेटे ने संभाली कमान — तालिबान का नया आक्रामक चेहरा

इस भीषण और समन्वित हमले की सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी खबर यह है कि तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर के बेटे और वर्तमान रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब ने स्वयं इस सैन्य जवाबी कार्रवाई की व्यक्तिगत रूप से कमान संभाल ली है। यह पहला ऐसा सार्वजनिक और स्पष्ट मौका है जब तालिबान के शीर्ष नेतृत्व ने पाकिस्तान के खिलाफ सीमावर्ती सैन्य जवाबी कार्रवाई का निर्देश दिया हो, जो दोनों देशों के रिश्तों में एक नया और खतरनाक मोड़ है। मुल्ला याकूब ने अपने सैनिकों को कड़े शब्दों में आदेश दिया है कि “अब और नहीं झुकना। 

पाकिस्तान को वही महसूस कराना है जो उसने हमें सालों तक कराया।” इस आक्रामक बयान के बाद, तालिबान के लड़ाकों ने सीमा चौकियों पर अपने झंडे लहराते हुए घोषणा की है कि “यह बदले की जंग है, यह हमारी जमीन की रक्षा का युद्ध है।” तालिबान ने दावा किया है कि इस हमले में उसने पाकिस्तान की दो चौकियों को ध्वस्त कर दिया है और पाकिस्तानी सेना के कई सैनिकों को निशाना बनाया है, हालांकि तालिबान के इन दावों की किसी भी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हो पाई है।

पाकिस्तान की घबराहट — सीमा पर हाई अलर्ट, जवाबी गोलाबारी जारी

तालिबान के इस अचानक, संगठित और बड़े हमले से पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियाँ सकते में आ गई हैं। पाकिस्तान आर्मी ने इस स्थिति से निपटने के लिए तुरंत बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और उत्तरी वजीरिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया है। स्थानीय पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की तोपख़ाने (Artillery) और ड्रोन यूनिट्स ने अफगान ठिकानों पर जवाबी गोलाबारी और फायरिंग शुरू कर दी है। 

सीमा के आस-पास के गाँवों और कस्बों में रहने वाले नागरिकों को तेज़ी से खाली करवाया जा रहा है, और संभावित सुरक्षा कारणों से कई संवेदनशील इलाकों में मोबाइल नेटवर्क भी बंद कर दिया गया है। इस गंभीर हमले के तुरंत बाद, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल को एक “कड़ी चेतावनी” जारी की है, जिसमें संयम बरतने को कहा गया है, जबकि इसके जवाब में एक अफगान प्रवक्ता ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा है कि “अगर पाकिस्तान ने फिर से सीमा का उल्लंघन किया, तो हम इस बार इस्लामाबाद तक जवाब देंगे।”

क्षेत्रीय तनाव — दक्षिण एशिया में अस्थिरता का नया दौर

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच इस बढ़ते और हिंसक टकराव ने पूरे दक्षिण एशिया में सुरक्षा और स्थिरता की गंभीर चिंताएँ बढ़ा दी हैं। भारत, ईरान और चीन सहित क्षेत्र के सभी प्रमुख देश इस तेज़ होते घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष अब किसी “सीमित सीमा झड़प” के दायरे से बहुत आगे बढ़ सकता है और पूरे क्षेत्र के राजनीतिक संतुलन को मौलिक रूप से बदलने की क्षमता रखता है।

 अफगान तालिबान अब खुद को एक ऐसी स्वतंत्र और मज़बूत शक्ति के रूप में पेश कर रहा है जो किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, जबकि पाकिस्तान — जो कभी तालिबान का संरक्षक माना जाता था — आज उसका मुख्य और खुला सैन्य लक्ष्य बन गया है। यह नया समीकरण पूरे दक्षिण एशियाई भू-राजनीति को अस्थिरता के एक नए दौर में धकेल सकता है।

बदले की आग में जलता सरहदी इलाका

दर्रंद रेखा (Durand Line), जिसे कभी ब्रिटिश काल में नक्शे पर खींची गई एक मात्र रेखा माना जाता था, अब बारूद से जलती हुई एक खूनी हकीकत बन गई है। तालिबान और पाकिस्तान के बीच के सदियों पुराने रिश्ते अब “भाईचारे” से एक स्पष्ट “वैर” में बदल चुके हैं। मुल्ला उमर के बेटे के व्यक्तिगत नेतृत्व में शुरू किया गया यह हमला सिर्फ़ एक सैन्य जवाबी अभियान नहीं है, बल्कि यह तालिबान की नई राजनीतिक पहचान का स्पष्ट ऐलान है — कि “अब अफगानिस्तान किसी का मोहरा नहीं, बल्कि अपनी नियति का स्वयं मालिक बनेगा।” 

पाकिस्तान की सीमाओं पर सुनाई देने वाली गोलियों की आवाज़ अब केवल एक चेतावनी नहीं है, बल्कि एक नए और गहरे संघर्ष की शुरुआत है — और यह संघर्ष न सिर्फ़ दोनों पड़ोसी देशों की, बल्कि व्यापक रूप से पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र की किस्मत तय करने वाला है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments