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“भारत में बने 80% TV के पुर्ज़े चीन से आते हैं” — ‘मेक इन इंडिया’ पर Rahul Gandhi का सवाल

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 19 फरवरी 2026

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार की औद्योगिक नीति और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि भारत में बने अधिकांश टीवी सेट्स के करीब 80% पुर्ज़े चीन से आयात होते हैं। उनके अनुसार देश में वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग के बजाय केवल असेंबली का काम किया जा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि iPhone से लेकर टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों तक, अहम कंपोनेंट्स—जैसे डिस्प्ले पैनल, सेमीकंडक्टर, चिपसेट और अन्य हाई-टेक पार्ट्स—विदेशों से आते हैं और भारत में केवल उन्हें जोड़कर अंतिम उत्पाद तैयार किया जाता है। उन्होंने इसे “स्क्रूड्राइवर असेंबली मॉडल” बताते हुए कहा कि इससे न तो पर्याप्त रोजगार सृजित होता है और न ही तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल होती है।

उन्होंने आगे कहा कि छोटे और मध्यम उद्योग असली निर्माण करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें नीति और संरचनात्मक समर्थन नहीं मिल रहा। भारी टैक्स, सीमित तकनीकी ट्रांसफर और कुछ बड़े कॉरपोरेट्स के वर्चस्व का भी उन्होंने उल्लेख किया। राहुल गांधी के मुताबिक, जब तक भारत कोर टेक्नोलॉजी और कंपोनेंट स्तर पर आत्मनिर्भर नहीं बनेगा, तब तक “मेक इन इंडिया” केवल नारे तक सीमित रहेगा।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और निवेश सुधारों के चलते मोबाइल निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार का दावा है कि भारत अब मोबाइल फोन निर्माण और निर्यात के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण तेजी से बढ़ा है, लेकिन कुल वैल्यू एडिशन अभी भी सीमित है। कई अहम तकनीकी कंपोनेंट्स चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से आयात किए जाते हैं। हालांकि, सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर स्थानीय सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

राहुल गांधी का बयान ऐसे समय आया है जब आत्मनिर्भर भारत, वैश्विक सप्लाई चेन और चीन पर निर्भरता जैसे मुद्दे राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। अब यह देखना होगा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच भारत की वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने के लिए कौन से ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाए जाते हैं।

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