Home » National » 78 की उम्र, लोहा ऐसा: किसान मोहिंदर कौर ने कंगना की माफी ठुकराई

78 की उम्र, लोहा ऐसा: किसान मोहिंदर कौर ने कंगना की माफी ठुकराई

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

चंडीगढ़ 4 नवंबर 2025

पंजाब के बठिंडा जिले की 78 वर्षीय महिला किसान मोहिंदर कौर आज पूरे देश में दृढ़ता और आत्म-सम्मान की मिसाल बन चुकी हैं। किसान आंदोलन के समय सोशल मीडिया पर फैलाई गई गलत जानकारी और अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ उन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत के खिलाफ अदालत में मानहानि का मामला दर्ज कराया था। चार साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भले ही कंगना ने कोर्ट में खड़े होकर माफी मांग ली है, लेकिन मोहिंदर कौर ने साफ शब्दों में कह दिया —

“मुझे मेरी इज्ज़त चाहिए, सिर्फ माफी नहीं। मैं पीछे नहीं हटूंगी।”

यह पूरा मामला वर्ष 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान शुरू हुआ। कंगना ने एक ट्वीट में दावा किया था कि प्रदर्शन कर रही महिलाएँ पैसे लेकर आंदोलन में शामिल हो रही हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में जिस बुजुर्ग महिला की तस्वीर का उपयोग किया था, उन्हें गलत तरीके से शाहीन बाग की दादी बिल्किस बताया और यह भी लिखा कि “100 रुपये में उपलब्ध हैं।” जबकि वह महिला कोई और नहीं, बल्कि किसान नेता मोहिंदर कौर थीं, जिन्होंने अपने खेत-खलिहानों से निकलकर किसानों के अधिकारों की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाया। इस झूठे प्रचार से आहत होकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

मोहिंदर कौर एक साधारण किसान परिवार से हैं, लेकिन हिम्मत में किसी से कम नहीं। बठिंडा जिले के बहादुरगढ़ जंडियां गांव में 13 एकड़ खेती करने वाली यह बुजुर्ग किसान अपने जीवन में पहले ही कई संघर्ष झेल चुकी हैं। उनके पति लाभ सिंह 80 वर्ष के हैं और बीमारियों के कारण बिस्तर पर हैं। उनका बेटा भी लंबे समय से गंभीर संक्रमण से जूझ रहा है और उसकी पत्नी की भी मृत्यु इसी बीमारी से हो चुकी है। ऐसी कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद मोहिंदर कौर ने अपने आत्मसम्मान की लड़ाई जारी रखी।

अदालत में कंगना रनौत ने अपनी गलती स्वीकार कर खेद जताया और माफी मांगी, जिसके बाद उन्हें जमानत भी मिल गई। मगर मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। मोहिंदर कौर ने साफ कर दिया कि वे सच्चाई और सम्मान की जीत तक पीछे नहीं हटने वाली। उन्होंने कहा —

“जिसने मेरे माथे पर मिट्टी का दाग लगाने की कोशिश की, उसे यह दाग मिटते हुए देखना होगा।”

इस केस की अगली सुनवाई 24 नवंबर को होनी है, और सभी की निगाहें इस ऐतिहासिक मुकदमे पर टिकी हैं। यह सिर्फ एक महिला किसान का संघर्ष नहीं, बल्कि हर उस आवाज़ की लड़ाई है जिसे सोशल मीडिया की भीड़ ने कभी अपमानित किया, चुप कराने की कोशिश की। मोहिंदर कौर यह साबित कर चुकी हैं कि “उम्र शरीर को कमजोर कर सकती है, लेकिन सम्मान की लड़ाई लड़ने का जोश नहीं।”जब तक उनके आत्म-सम्मान को न्याय नहीं मिल जाता, यह जंग जारी रहेगी — और पूरे किसान समाज की दुआएँ उनके साथ खड़ी हैं।

 

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments