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धारावी में 70,000 वोटरों की ‘हेरा-फेरी’: दूर-दूर की वार्डों में नाम शिफ्ट, कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल

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अमरनाथ । मुंबई 26 नवंबर 2025

धारावी में लगभग 70,000 वोटरों के सामूहिक रूप से एक वार्ड से कई किलोमीटर दूर दूसरे वार्ड में शिफ्ट किए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। धारावी कांग्रेस का दावा है कि हाल ही में जारी मतदाता सूची में यह कोई सामान्य गलती नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘मास डिस्प्लेसमेंट’ है, जिसे समझ पाना मुश्किल है क्योंकि जिन वार्डों में नाम भेजे गए हैं, उनका मूल मतदान क्षेत्र से कोई भौगोलिक या तार्किक संबंध ही नहीं है। इस असामान्य बदलाव को देखते हुए कांग्रेस ने संबंधित वार्ड अधिकारी को औपचारिक शिकायत सौंप दी है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि धारावी के कई इलाकों में 6000 से 10,000 वोटर एक ही वार्ड से उठाकर पूरी तरह से असंबंधित और दूरस्थ वार्डों में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। सोशल नगर जैसे पूरे मोहल्लों के नाम तक दूसरे छोर पर भेज दिए गए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह गड़बड़ी इतनी संगठित और बड़े पैमाने पर है कि इसे एक साधारण त्रुटि कहना संभव नहीं। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य स्पष्ट है — मतदाताओं में भ्रम फैलाना, मतदान के दिन बूथ पर अफरा-तफरी पैदा करना और हजारों लोग जब अपने नाम सूची में गायब पाएँगे तो उन्हें मतदान से वंचित कर देना।

कांग्रेस का एक बड़ा आरोप यह भी है कि चुनाव आयोग के पास ऐसी बड़ी गड़बड़ी को रिपोर्ट करने का कोई ठोस सिस्टम ही नहीं है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, हर एक वोटर के लिए अलग-अलग फॉर्म भरना अनिवार्य है, जबकि यहां प्रति वार्ड 6000 से 10,000 नाम बदले गए हैं। ऐसे में कुछ ही दिनों की अवधि में हजारों फॉर्म भरना लगभग असंभव है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया को जानबूझकर इतना जटिल बनाया गया है कि लोग समय पर आपत्ति ही दर्ज न कर पाएं।

धारावी कांग्रेस का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि नौकरशाही का हथियारकरण (Weaponisation of Bureaucracy) है। नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग ने ‘प्रक्रिया को ही सज़ा बनाने’ वाली नीति अपनाई है, जिससे आम मतदाताओं पर बोझ बढ़ा है और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह ‘वोट चोरी’ की कोशिश प्रतीत होती है, जिसमें मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी की गई है ताकि धारावी के वोटरों को कमजोर किया जा सके।

कांग्रेस ने 2017 की मतदाता सूची को संदर्भ बिंदु बनाकर मौजूदा रिकॉर्ड की तुरंत समीक्षा की मांग की है, क्योंकि उनके अनुसार 2017 की सूची में कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं थी और सभी प्रविष्टियाँ सही थीं। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अब पूरे धारावी में मतदाता सूची की गहराई से जांच जारी रखेगी और हर एक गड़बड़ी पर औपचारिक शिकायत करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस ‘वोट हेरफेर’ को उजागर करने का अभियान जारी रहेगा और मतदाताओं के हर अधिकार के लिए संघर्ष किया जाएगा। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यह लड़ाई सिर्फ एक शिकायत की नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत रखने की है।

 

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