लंदन 24 अक्टूबर 2025
उत्तरी आयरलैंड के डेरी शहर में 30 जनवरी 1972 को हुए “ब्लडी संडे” (खूनी रविवार) की हृदयविदारक घटना के 53 साल बाद, न्याय की अधूरी यात्रा ने पीड़ितों के परिवारों को एक और गहरा झटका दिया है। गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 को ब्रिटेन की अदालत ने ब्रिटिश सेना के एक पूर्व पैराट्रूपर, जिसे गोपनीयता के कारण केवल ‘सोल्जर F’ (Soldier F) के नाम से जाना जाता है, को सभी आरोपों से बरी कर दिया। सोल्जर F पर दो निहत्थे नागरिकों, विलियम मैकिनी और जेम्स रे की हत्या और पाँच अन्य पर हत्या के प्रयास का आरोप था, ये सभी आरोप उस दिन हुई गोलीबारी से संबंधित थे जिसमें कुल 14 बेगुनाह नागरिक मारे गए थे। अभियोजन पक्ष ने इसे “साफ-साफ युद्ध अपराध” करार दिया था, जबकि बचाव पक्ष ने आत्मरक्षा का तर्क दिया। बेलफास्ट क्राउन कोर्ट के न्यायाधीश पैट्रिक लिंच ने अपने फैसले में स्वीकार किया कि ब्रिटिश सेना ने उस दिन “अनुशासन तोड़ा और नियंत्रण खो दिया” और गोलीबारी निहत्थे नागरिकों पर की गई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष उन “ठोस साक्ष्य” को प्रस्तुत करने में विफल रहा जो “संशय से परे” यह साबित कर सकें कि गोलीबारी विशेष रूप से सोल्जर F द्वारा ही की गई थी। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि लगभग 54 साल बीत जाने से कानूनी प्रक्रिया मुश्किल हो गई है और प्रमाण का उच्च मानक पूरा नहीं हो सका। इस फैसले ने न्याय की आस में आधी सदी से भी अधिक समय से बैठे परिवारों की उम्मीदों को तोड़ दिया है, और उनके लिए यह एक और गंभीर झटका है।
पीड़ित परिवारों का गुस्सा और दर्द: ‘हमारे लोग मरे, लेकिन अपराधी आज़ाद!’
सोल्जर F के बरी होने की खबर आते ही ब्लडी संडे के पीड़ितों के परिजनों का गुस्सा और दर्द एक बार फिर अदालत के बाहर फूट पड़ा। प्रदर्शनकारी परिवारों ने इस फैसले को “न्याय का मज़ाक” और “विश्वासघात” बताया, जिसने उनके घावों को फिर से हरा कर दिया। एक पीड़ित की बहन ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके भाई को सड़कों पर बेवजह गोलियों से मार दिया गया, फिर भी 53 साल बाद भी अदालत किसी को दोषी नहीं ठहराती है। परिजनों ने सीधे तौर पर ब्रिटिश सरकार पर आरोप लगाया कि वह सेना की छवि को दाग़ लगने से बचाने के लिए जानबूझकर सैनिकों को बचा रही है।
यह फैसला उन परिवारों के लिए एक कड़वा अंत है, जिन्होंने दशकों तक अनगिनत रैलियों और कानूनी लड़ाइयों के ज़रिए न्याय की मांग की। उनके अनुसार, आज सैनिक बरी हो गया है, लेकिन उनके ज़ख्म और दर्द ताज़ा हो गए हैं। इस आक्रोश को उत्तरी आयरलैंड की राजनीतिक हस्तियों और मानवाधिकार संगठनों का भी समर्थन मिला, जिन्होंने इस फैसले को “गहरा निराशाजनक” बताया, जो इंग्लैंड और उत्तरी आयरलैंड के बीच पुरानी खाई को और चौड़ा कर सकता है।
ब्लडी संडे की विरासत और न्याय की लड़ाई: इतिहास के हवाले?
ब्लडी संडे उत्तरी आयरलैंड के दशकों लंबे संघर्ष, जिसे “The Troubles” कहा जाता है, का एक निर्णायक और काला अध्याय बन गया था। इस घटना के तुरंत बाद हुई एक जांच ने सैनिकों को दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन बाद में 2010 में लॉर्ड सैविल की अध्यक्षता में हुई एक सार्वजनिक जांच ने पाया कि हत्याएं “अनुचित और अन्यायपूर्ण” थीं और पीड़ित निर्दोष थे। इस जांच के निष्कर्षों के बाद तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने संसद में औपचारिक माफी मांगते हुए कहा था कि “ब्लडी संडे पर जो हुआ वह न तो न्यायसंगत था, न ही माफ़ करने योग्य।” यह माफी एक महत्वपूर्ण कदम थी, लेकिन पीड़ितों के परिवारों को कभी यह महसूस नहीं हुआ कि उन्हें वास्तविक न्याय मिला है।
सोल्जर F का बरी होना इस लंबी लड़ाई का एक विवादास्पद निष्कर्ष है, जो कानूनी रूप से भले ही ‘समाप्त’ हो गया हो, लेकिन नैतिक रूप से अधूरा रह गया है। सड़कों पर फिर से वही पुराना नारा गूंजा – “No justice, no peace!” (न्याय नहीं, तो शांति नहीं!)। ब्लडी संडे अब इतिहास की किताबों में दर्ज हो चुका है, लेकिन 14 परिवारों के लिए, यह आज भी एक ऐसा जारी मुकदमा है, जिसमें तारीखें बीत गईं पर न्याय अभी भी अनिश्चितता के “अस्थायी स्थगन” में है।




