राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/पटना | 17 मार्च 2026
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद के. सी. त्यागी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी है। राज्यसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जीत के ठीक एक दिन बाद यह फैसला सामने आया है, जिसे बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। त्यागी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान और विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि उन्होंने इस बार अपनी JDU सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया, जिससे वे अब पार्टी से औपचारिक रूप से अलग हो चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम किसी व्यक्तिगत नाराजगी या वैचारिक मतभेद के कारण नहीं है। नीतीश कुमार के साथ उनके लगभग 50 साल पुराने राजनीतिक रिश्ते का जिक्र करते हुए त्यागी ने कहा, “मन में कोई कटुता नहीं है, व्यक्तिगत सम्मान पहले जैसा ही रहेगा।”
त्यागी ने आगे कहा कि उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता किसानों, वंचितों और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति पहले की तरह अटूट बनी रहेगी। उन्होंने संकेत दिया कि अब उनका फोकस उत्तर प्रदेश की राजनीति पर होगा। इसी क्रम में 22 मार्च 2026 को दिल्ली के मावलंकर हॉल में समर्थकों के साथ बैठक बुलाई गई है, जहां भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी।
पृष्ठभूमि और प्रभाव : केसी त्यागी लंबे समय से JDU के प्रमुख रणनीतिकार, राजनीतिक सलाहकार और राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे हैं। वे जनता दल के समाजवादी धड़े से जुड़े थे और नीतीश कुमार के साथ 1970 के दशक से सक्रिय थे। पार्टी में उनकी भूमिका नीतिगत बयानबाजी और गठबंधन प्रबंधन में अहम रही। हाल के वर्षों में त्यागी कुछ मुद्दों (जैसे वक्फ संशोधन, UCC, गाजा संघर्ष) पर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते दिखे थे, जिससे वे हाशिए पर आ गए थे। JDU प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद के हालिया बयानों से भी संकेत मिल चुके थे कि पार्टी का उनसे कोई औपचारिक संबंध नहीं बचा।
यह घटना JDU के लिए झटका मानी जा रही है, खासकर तब जब बिहार में NDA गठबंधन के भीतर समीकरण संतुलित हैं और 2025 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि त्यागी का अलग होना नीतीश कुमार की उत्तराधिकार योजना या पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल उठा सकता है।
अब सभी की नजर त्यागी के 22 मार्च के कार्यक्रम और उनके अगले कदम पर टिकी है—क्या वे नई पार्टी बनाएंगे, किसी मौजूदा दल में शामिल होंगे, या स्वतंत्र राजनीति चुनेंगे?




