टोरंटो/नई दिल्ली 13 अक्टूबर 2025
कनाडा के इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज़ एंड सिटिजनशिप विभाग (IRCC) की एक ताज़ा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में पढ़ाई के लिए आए 47,000 विदेशी छात्र वर्तमान में “लापता” हैं — यानी न तो वे अपने कॉलेजों में मौजूद हैं, न उनके ठिकानों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें सबसे बड़ी संख्या भारतीय छात्रों की है।
कनाडा के इमीग्रेशन मंत्रालय ने इसे “Missing in Action Students” की श्रेणी में रखा है — यानी ऐसे छात्र जिन्होंने वीज़ा और प्रवेश तो प्राप्त किया, लेकिन पढ़ाई या उपस्थिति के कोई प्रमाण नहीं मिले। कई मामलों में फर्जी कॉलेज एडमिशन लेटर, दलालों की धोखाधड़ी, और स्टडी वीज़ा के दुरुपयोग के मामले भी पाए गए हैं।
भारतीय छात्र सबसे अधिक प्रभावित
IRCC की रिपोर्ट के अनुसार, कुल लापता छात्रों में से लगभग 60 प्रतिशत भारतीय मूल के हैं, जबकि बाकी में नाइजीरिया, फिलीपींस, बांग्लादेश, और ईरान के छात्र शामिल हैं। कनाडा में भारतीय छात्रों की कुल संख्या 3 लाख से अधिक है, जिनमें से एक बड़ी हिस्सेदारी पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से है।
कनाडा सरकार ने इसे “शिक्षा और इमीग्रेशन सिस्टम की गंभीर विफलता” करार दिया है। IRCC के प्रवक्ता ने कहा “हमें एहसास है कि कुछ निजी कॉलेज और एजेंट्स ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दुरुपयोग किया है। सरकार अब ऐसे फर्जी संस्थानों और बिचौलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।”
भारतीय दूतावास भी सक्रिय हुआ
इस मामले पर भारत सरकार और ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने भी गंभीर चिंता जताई है। भारतीय दूतावास ने कहा है कि कनाडा में रहने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा, शिक्षा और वैध स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है। भारतीय उच्चायोग के एक अधिकारी ने बताया, “हमने कनाडाई अधिकारियों से सभी लापता भारतीय छात्रों की सूची मांगी है। साथ ही, वीज़ा एजेंसियों और कॉलेजों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।”
दलालों और एजेंटों का खेल
विशेषज्ञों के अनुसार, कनाडा में पढ़ाई के नाम पर फर्जीवाड़ा और मिडलमैन नेटवर्क एक बड़ा उद्योग बन चुका है। कई एजेंट छात्रों से लाखों रुपये लेकर नकली ऑफर लेटर या फर्जी वीज़ा दस्तावेज़ बनवा देते हैं। छात्र वहां पहुंचने के बाद कॉलेज में दाखिला नहीं लेते और अवैध रूप से काम करने लगते हैं। कई ऐसे मामलों में छात्र मानव तस्करी या अवैध श्रम नेटवर्क का हिस्सा भी बन जाते हैं।
शिक्षा की विश्वसनीयता पर असर
कनाडा लंबे समय से भारतीय छात्रों का पसंदीदा गंतव्य रहा है। 2024 में ही करीब 2.8 लाख भारतीय छात्रों ने कनाडा में अध्ययन की अनुमति प्राप्त की थी। लेकिन अब यह खुलासा न केवल कनाडा के शिक्षा ढांचे पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि भारतीय समाज में भी चिंता का विषय बन गया है — क्योंकि विदेश में पढ़ाई का सपना अब जोखिम और शोषण के जाल में फँसता दिख रहा है।
सख्त कार्रवाई की तैयारी
IRCC ने घोषणा की है कि वह अब हर अंतरराष्ट्रीय छात्र की बायोमेट्रिक और वीज़ा ट्रैकिंग सिस्टम को अपडेट करेगा। फर्जी कॉलेजों की लिस्ट पब्लिक की जाएगी और वीज़ा एजेंटों के लिए नया लाइसेंसिंग कानून लागू किया जाएगा।
कनाडा में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के संगठन ने भी मांग की है कि ऐसे मामलों की जांच भारत और कनाडा के संयुक्त सहयोग से की जाए ताकि निर्दोष छात्रों को परेशानी न हो और दोषी एजेंटों को सख्त सज़ा मिले।
भारत में शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ कनाडा का नहीं, बल्कि विदेश में पढ़ाई की पूरी व्यवस्था के गिरते मानकों और अव्यवस्था का प्रतीक है। जब तक छात्रों को ठोस काउंसलिंग और पारदर्शी मार्गदर्शन नहीं मिलेगा, ऐसे हादसे बढ़ते रहेंगे।




