धरती का दम घोंटती प्लास्टिक : हर सांस, हर कण में ज़हर
21वीं सदी के तेजी से बढ़ते आधुनिक युग में जहां एक ओर तकनीकी प्रगति ने मानव जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं दूसरी ओर प्लास्टिक जैसी ‘क्रांतिकारी खोज’ ने पर्यावरण के समक्ष एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। प्लास्टिक प्रदूषण केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं है, यह एक सर्वव्यापी आपदा है जो हमारी धरती, […]
भारत भारतीय भारतीयता: अद्भुत अद्वितीय अतुलनीय अकल्पनीय
भारत, एक ऐसा राष्ट्र है जिसे न केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से, बल्कि उसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से पहचाना जाता है। यह भूमि प्राचीनता और आधुनिकता के अद्भुत सम्मिलन का प्रतीक है, जहां हजारों वर्षों की सभ्यता, संस्कृतियों का संगम, और धर्मों की विविधता एक अद्वितीय कहानी बयां करती है। भारत न केवल एक […]
केरल की जल-यात्रा: नावों में तैरती संस्कृति, झीलों में बसता जीवन
तिरुवनंतपुरम, केरल 15 अगस्त 2025 हाउसबोट्स की दुनिया — जब घर पानी पर तैरता है केरल का नाम आते ही सबसे पहली छवि जो मन में उभरती है, वह है शांत जलराशि पर तैरती हाउसबोट्स की श्रृंखला, जिनकी खिड़कियों से सूरज डूबते हुए झील में समा जाता है। 2025 में केरल सरकार ने हाउसबोट पर्यटन […]
प्यार का सेक्स रोमांच देता है और हवस का सेक्स ग्लानि: एक गहरा मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विश्लेषण

सेक्स: केवल शारीरिक क्रिया नहीं, भावनाओं का दर्पण सेक्स केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारी भावनाओं, मानसिकता, और आध्यात्मिकता का भी प्रतिबिंब होता है। जब हम सेक्स को केवल शारीरिक क्रिया के रूप में देखते हैं, तो हम इसके गहरे अर्थों और प्रभावों को नजरअंदाज कर देते हैं। यह क्रिया उस भावनात्मक […]
धर्म नहीं अधर्म : जब आस्था बन जाए दिखावा और भक्ति बन जाए हथियार

नई दिल्ली 15 अगस्त 2025 जब धर्म आचरण नहीं, प्रदर्शन बन जाए धर्म का मूल स्वभाव है—सत्य, करुणा, क्षमा और सेवा। लेकिन जब धर्म केवल रीतियों और रस्मों में सिमट जाए, जब वह आचरण की जगह केवल मंच का प्रदर्शन बन जाए, तो उसकी आत्मा खो जाती है। आज मंदिरों की गूंज में घनघोर घंटियाँ […]
खाद्य सुरक्षा और आयात के मायने?
15 अगस्त 2025 आलोक रंजन, वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार किसी भी देश के लिए खाद्य सुरक्षा के मायने हैं। दरअसल खाद्य सुरक्षा भारतीय कृषि अर्थव्वस्था के लिए गंभीर चुनौती है। खासकर जब देश की आधी आबादी खेती के जरिए अपना जीवनयापन कर रही हों। खाद्य सुरक्षा से यहां मतलब सिर्फ भंडारण या अनाजों को चूहों […]
कश्मीर में अदृश्य रणभूमि: कैसे सुरक्षाबल और खुफिया एजेंसियाँ बना रही हैं देश की सुरक्षा की अपराजेय दीवार
कश्मीर की सरहद पर बहादुरी का पराक्रम 15 अगस्त 2025 को जब पूरा भारत आज़ादी का 79वाँ पर्व मना रहा है, तब कश्मीर की घाटी में सैकड़ों सैनिक अपने बूटों के नीचे बर्फ और बारूद को रौंदते हुए सरहद की हिफाज़त कर रहे हैं। ये वो रणभूमि है जहाँ दुश्मन की गोली से ज़्यादा खतरनाक […]
मुसलमान और ‘वन्दे मातरम्’ — एक ऐतिहासिक बहस का संतुलित परिप्रेक्ष्य

भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं था, बल्कि यह एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी था। इसी दौर में 1870 के दशक में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘आनन्द मठ’ उपन्यास के लिए संस्कृत-बांग्ला मिश्रित कविता ‘वन्दे मातरम्’ लिखी। यह कविता मातृभूमि को देवी के रूप में चित्रित करती है — सुजलाम, सुफलाम, मलयज-शीतलाम… और माँ दुर्गा, […]
एक्सक्लूसिव: अलीगढ़ से अमेरिका तक, मुस्लिम छात्रों की ग्लोबल उड़ान
कभी पिछड़ेपन, पहचान के भय और सीमित संसाधनों के दायरे में सिमटे मुस्लिम छात्र आज दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटियों में अपनी काबिलियत का परचम लहरा रहे हैं। वर्षों तक सामाजिक दबाव और आर्थिक बेड़ियों से जूझने के बावजूद अब वे हार्वर्ड, ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, मलेशिया की इस्लामिक यूनिवर्सिटी, कतर फाउंडेशन और खाड़ी देशों के प्रमुख शैक्षणिक […]
मोदी का मिशन 2047: सुरक्षा कवच, GST कट, करोड़ों नौकरियां और डेमोग्राफिक संतुलन का संकल्प

नई दिल्ली 15 अगस्त 2025 दिल्ली का लाल किला एक बार फिर इतिहास का साक्षी बना, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगे के नीचे अपना 12वाँ स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया। चारों ओर तिरंगों की लहर, बच्चों के हाथ में छोटे-छोटे झंडे और राष्ट्रीय गीतों की गूंज माहौल को और भी भावुक बना रही थी। इस […]