कुर्बानी: सिर्फ रिवायत नहीं, आर्थिक क्रांति, सेवा और साझेदारी का प्रतीक
जून के पहले शनिवार को ईद-उल-अज़हा है, जिसे आम बोलचाल में बकरीद के नाम से जाना जाता है। भारतीय समाज में यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं रह गई है, बल्कि यह आज के समय में आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और साझेदारी के नए प्रतिमान स्थापित करने वाला पर्व बन चुका है। यह त्योहार इस्लामी…
