महेंद्र सिंह | नई दिल्ली 4 नवंबर 2025
1988 की वह ऐतिहासिक रात जब मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश अपने चरम पर थी, तब भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने न सिर्फ पड़ोसी देश को बचा लिया बल्कि दुनिया को भारत की रणनीतिक शक्ति का एहसास भी करा दिया। मालदीव की राजधानी माले पर विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया था, राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गय्यूम अपनी जान बचाने के लिए छिपते घूम रहे थे और देश की संप्रभुता खत्म होने वाली थी। ऐसे में एसओएस संदेश दिल्ली पहुँचा — और राजीव गांधी ने बिना एक पल गंवाए मदद का आदेश दे दिया।
यह सिर्फ कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं थी — यह उस पड़ोसी धर्म का असली स्वरूप था जिसे भारत हमेशा निभाता आया है। राजीव गांधी के आदेश पर भारतीय वायुसेना ने रातों-रात ऑपरेशन कैक्टस शुरू किया। भारी दूरी, सीमित समय और राजधानी पर कब्जे के बावजूद भारतीय सेना ने दुनिया को साबित किया कि वह किसी भी स्थिति में मानवता और लोकतंत्र की ढाल बन सकती है। वायुसेना के IL-76 विमान मुंबई से सीधा मालदीव की धरती पर उतरे और भारतीय पैराट्रूपर्स ने महज 16 घंटे के भीतर विद्रोहियों को घेरकर सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।
भारतीय नौसेना ने समुद्र की तरफ भागते बागियों का पीछा कर उन्हें गिरफ्तार किया। बिना बड़ा संघर्ष, बिना नागरिकों का नुकसान — यह ऑपरेशन सैन्य इतिहास में सबसे तेज़ और सफल बाहरी हस्तक्षेपों में गिना जाता है। दुनिया के कई शक्तिशाली देश उस समय हालात का “मूल्यांकन” कर रहे थे — लेकिन भारत ने नेतृत्व और जिम्मेदारी दोनों निभाई। संदेश स्पष्ट था: “दक्षिण एशिया में संकट आएगा तो भारत खड़ा मिलेगा — सिर्फ बातों से नहीं, कार्रवाई से।”
मालदीव ने इस ऐतिहासिक बचाव अभियान के सम्मान में 3 नवंबर को “विक्ट्री डे” घोषित किया — और हर साल भारत के साहस तथा राजीव गांधी के नेतृत्व को याद किया जाता है। इस मिशन के बाद भारत-मालदीव संबंधों में भरोसा और सहयोग और अधिक गहरा हुआ। भारत की तीनों सेनाओं की समन्वित क्षमता और राजनीतिक नेतृत्व की दृढ़ता ने यह स्पष्ट किया कि हिंद महासागर में शांति और सुरक्षा की सबसे मजबूत दीवार भारत ही है।
37 वर्ष बाद भी ऑपरेशन कैक्टस भारत की सैन्य और कूटनीतिक श्रेष्ठता की पहचान है — लेकिन इससे भी बढ़कर यह एक युवा प्रधानमंत्री के साहसी निर्णय की अमर गाथा है। वैश्विक राजनीति में यह उदाहरण आज भी पढ़ाया जाता है कि कैसे एक सही निर्णय इतिहास को नया मोड़ दे सकता है।
और इसलिए, जब मालदीव आज भी कहता है —
“हम ज़िंदा हैं, क्योंकि भारत खड़ा था”
तो उसके पीछे सबसे बड़ा श्रेय जाता है —
राजीव गांधी के नेतृत्व, भारत की सेना के पराक्रम और पड़ोसी के प्रति हमारे कर्तव्यबोध को।




