एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 2 मार्च 2026
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बेटियों के सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ा वित्तीय कदम सामने आया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने 40 हजार से अधिक लड़कियों के बैंक खातों में लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की है। यह भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से किया गया, जिससे लाभार्थियों के खातों में बिना किसी बिचौलिये के पैसा पहुँचा। सरकार का दावा है कि यह कदम लंबे समय से लंबित भुगतान को निपटाने और पात्र बेटियों को उनका अधिकार दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कुल 40,642 लड़कियों के खातों में यह धनराशि भेजी गई है। इससे पहले भी पहले चरण में हजारों लाभार्थियों को करोड़ों रुपये जारी किए जा चुके थे। बताया जा रहा है कि कई बेटियों की राशि तकनीकी कारणों, अधूरे बैंक विवरण या सत्यापन में देरी के कारण अटकी हुई थी, जिसे अब व्यवस्थित रूप से खातों में स्थानांतरित किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी उच्च स्तर पर की गई ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
यह राशि मुख्य रूप से उस योजना के तहत दी गई है जिसका उद्देश्य बेटियों की शिक्षा और भविष्य को आर्थिक आधार प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत जन्म के समय और पढ़ाई के विभिन्न चरणों पर सरकार की ओर से निर्धारित धनराशि जमा की जाती है। जब लाभार्थी बालिग हो जाती है और निर्धारित शैक्षणिक शर्तें पूरी करती है, तब संचित राशि उसके बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार विशेष अभियान चलाकर उन मामलों की पहचान की गई, जिनमें भुगतान लंबित था।
सरकार का यह भी कहना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से की गई। लाभार्थियों के बैंक खातों का सत्यापन, आधार लिंकिंग और दस्तावेजों की जांच के बाद ही धनराशि जारी की गई। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि पैसा सीधे सही व्यक्ति तक पहुँचे और किसी प्रकार की हेराफेरी की गुंजाइश न रहे। प्रशासनिक स्तर पर इसे एक “सिस्टम क्लीनअप ड्राइव” के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। समर्थकों का कहना है कि इससे बेटियों की पढ़ाई और आगे की योजनाओं को मजबूती मिलेगी, जबकि आलोचकों का आरोप है कि सरकार इस तरह की योजनाओं के माध्यम से जनता को आर्थिक राहत देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी चुनावी लाभ से इसका संबंध नहीं है।
वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में भी ऐसे मामलों की समीक्षा जारी रहेगी, ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी भुगतान से वंचित न रह जाए। साथ ही बैंकिंग प्रक्रियाओं को और सरल बनाने तथा जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की भी तैयारी है। सरकार का दावा है कि यह पहल केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बेटियों के आत्मविश्वास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस कदम के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे कितनी तेजी से शेष लंबित मामलों का निपटारा होता है और योजना का दायरा किस तरह विस्तार पाता है। फिलहाल हजारों परिवारों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है, जिनकी बेटियों के खातों में लंबे इंतजार के बाद धनराशि पहुँची है।




