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वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 से खत्म होगा भ्रष्टाचार, वंचित मुसलमानों को मिलेगा हक़ : MRM

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नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2025 —

भारत के संसदीय इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ उस समय आया जब वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करते हुए वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के रूप में लागू हो गया। इस विधेयक को लेकर जहां देश भर में बहस और विश्लेषण चल रहा था, वहीं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने इस कानून को गरीब, वंचित और अधिकारविहीन मुसलमानों के लिए न्याय और विकास का शक्तिशाली औजार बताया है। 

मंच के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद सईद ने इस अधिनियम को भारत के संविधान की भावना के अनुरूप बताते हुए कहा कि “वक्फ अब धर्म की राजनीति से मुक्त होकर राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का माध्यम बनेगा। यह कानून मुस्लिम समाज को भीख नहीं, हक़ दिलाता है।”

MRM की तरफ़ से कहा गया कि वक्फ संपत्तियाँ लंबे समय से भ्रष्टाचार, अतिक्रमण और तंत्र की मिलीभगत का शिकार रही हैं। जिनका उद्देश्य था गरीब, अनाथ, विधवा और असहाय मुसलमानों की मदद करना, वे संपत्तियाँ न तो पारदर्शिता से चल रही थीं और न ही जवाबदेही तय थी। हजारों करोड़ की वक्फ ज़मीनें या तो बेकार पड़ी थीं या माफ़ियाओं के कब्ज़े में। वक्फ अधिनियम 2025 में किए गए संशोधन इस स्थिति को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखते हैं। अब वक्फ बोर्डों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी संपत्तियों को दर्ज करना होगा, उनकी ऑडिटिंग CAG जैसे स्वतंत्र निकायों द्वारा कराई जाएगी, और बोर्डों में महिलाओं, पेशेवरों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।

इस ऐतिहासिक विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और JPC अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने यह स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों को कमजोर करना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना है। वहीं, MRM ने बताया कि उन्होंने इस कानून को जन-जन तक पहुँचाने के लिए देश भर में 5000 से अधिक वक्फ संवाद कार्यक्रम, जन जागरूकता सभाएँ, ऑनलाइन मीटिंग्स और संसदीय संवादों का आयोजन किया। MRM के कार्यकर्ताओं ने JPC के समक्ष लिखित सुझाव भी दिए, जिनमें वक्फ की सामाजिक उपयोगिता, महिला प्रतिनिधित्व, शैक्षणिक संस्थान निर्माण, और युवाओं को स्कॉलरशिप जैसे बिंदु प्रमुख थे। यह सभी अनुशंसाएँ विधेयक में शामिल की गईं, जो यह साबित करता है कि MRM का योगदान केवल समर्थन तक सीमित नहीं, बल्कि सक्रिय नीति-निर्माण का हिस्सा रहा।

विधेयक के पारित होते ही देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हो गईं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने इसे “मुस्लिम समाज की असल ज़रूरतों को पहचानने वाला कदम” बताया। वहीं भाजपा के नेता और मुस्लिम विद्वान मुफ्ती शमून क़ासमी ने कहा कि अब समय आ गया है जब मुसलमान धर्म के नाम पर लूटी गई वक्फ संपत्तियों की हक़दारी मांग सकें, और उनका इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में हो। MRM ने इस बात पर बल दिया कि अब वक्फ को राजनीतिक तंत्र या मजहबी प्रभुत्व का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का औजार बनना होगा, और यह अधिनियम इस दिशा में निर्णायक बदलाव लाने में सक्षम है।

हालांकि कुछ कट्टरपंथी संगठन और विपक्षी दलों ने कानून में सरकार की भूमिका और गैर-मुस्लिम विशेषज्ञों की बोर्ड में भागीदारी पर सवाल उठाए, लेकिन MRM ने स्पष्ट किया कि यह “सरकार द्वारा थोपे गए नियम नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज की मांगों और हितों पर आधारित लोकतांत्रिक निर्णय है।” उन्होंने कहा कि यदि वक्फ संपत्तियों पर समाज के सभी वर्गों की निगरानी और विशेषज्ञता होगी, तो भ्रष्टाचार और गुप्त सौदों पर पूर्ण विराम लगेगा।

इस विधेयक के लागू होने के साथ ही अब वक्फ बोर्डों को उनके कार्यों के लिए वार्षिक जवाबदेही रिपोर्ट, प्रभाव मूल्यांकन, और सामुदायिक लाभ योजना प्रस्तुत करनी होगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि मुस्लिम समुदाय के भीतर एक विश्वास का माहौल बनेगा कि राज्य व्यवस्था उनकी बेहतरी के लिए सक्रिय है। वक्फ अधिनियम 2025 के तहत विवाद समाधान के लिए ट्रिब्यूनल से लेकर हाईकोर्ट तक अपील की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है, जिससे अतिक्रमण, कब्ज़ा या संपत्ति विवाद वर्षों तक लंबित नहीं रहेंगे।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 केवल एक कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारतीय मुसलमानों के लिए एक नई सामाजिक क्रांति की दस्तक है। MRM ने यह साबित कर दिया कि जब मुसलमान राष्ट्रवादी सोच के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी करते हैं, तो वे न केवल समस्याओं का समाधान पा सकते हैं, बल्कि अपने समाज के लिए न्याय, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं। यह विधेयक वक्फ को धार्मिक सीमा से निकालकर सामाजिक सेवा, राष्ट्र निर्माण और वंचितों के पुनर्जागरण का प्रतीक बनाता है—एक ऐसा कदम जिसकी गूंज आने वाले वर्षों तक सुनाई देती रहेगी।

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