Home » National » वक्फ पर किरेन रिजिजू: सरकार किसी धर्मस्थल में हस्तक्षेप नहीं करेगी, सुधार गरीबों के लिए है

वक्फ पर किरेन रिजिजू: सरकार किसी धर्मस्थल में हस्तक्षेप नहीं करेगी, सुधार गरीबों के लिए है

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

2 अप्रैल 2025 |  नई दिल्ली

संसद के इतिहास में एक अहम दिन दर्ज हुआ जब केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पर गहन और ऐतिहासिक भाषण दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग, अवैध कब्ज़ों और भ्रष्टाचार को खत्म करना है। उन्होंने जोर देकर कहा, “सरकार किसी भी धर्म की मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्था में हस्तक्षेप नहीं कर रही है और न ही करेगी।” यह बयान उन्होंने विधेयक के उद्देश्य को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए दिया।

रिजिजू ने बताया कि संशोधित विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्डों को और अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और आधुनिक प्रणाली से लैस करना है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2013 में यूपीए सरकार ने एक संशोधन करके वक्फ संपत्तियों की परिभाषा का दायरा इतना बढ़ा दिया था कि संसद भवन और कई सरकारी इमारतों पर भी वक्फ का दावा किया जाने लगा था। उन्होंने इसे संविधान और राष्ट्र की संप्रभुता के विरुद्ध बताया और कहा कि यह बिल उसी विकृति को ठीक करने के लिए लाया गया है।

अपने भाषण में रिजिजू ने नए विधेयक की विशेषताओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि अब वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण, समयबद्ध ऑडिट, CAG द्वारा वित्तीय निगरानी, और विवाद समाधान के लिए न्यायिक ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट तक पहुंच का प्रावधान होगा। सबसे महत्वपूर्ण यह कि अब किसी संपत्ति को केवल ‘उपयोग’ के आधार पर वक्फ घोषित नहीं किया जा सकेगा — यानी “वक्फ बाय यूज़र” की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। उन्होंने इसे कानून की आत्मा के खिलाफ बताया और कहा कि इससे संपत्ति विवादों और जबरन कब्ज़ों को कानूनी मान्यता मिलने लगी थी।

रिजिजू ने यह भी बताया कि वक्फ बोर्डों में अब महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गैर-मुस्लिम विशेषज्ञों और पसमांदा समाज को प्रतिनिधित्व मिलेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक लोकतांत्रिक और समावेशी बनेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक क्रियाओं या मस्जिदों के संचालन में सरकार की कोई रुचि नहीं है, बल्कि यह बिल केवल प्रशासनिक सुधारों और समाज के वंचित तबकों तक वक्फ संपत्तियों का लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है।

किरेण रिजिजू का भाषण केवल तथ्यों और कानून की व्याख्या नहीं था, बल्कि उसमें भावनात्मक दृष्टिकोण भी झलक रहा था। उन्होंने कहा कि “जिन लोगों के नाम पर वक्फ संपत्तियां दी गईं, वे लोग आज झोपड़ियों में रह रहे हैं। जबकि वक्फ पर कुछ लोगों का एकाधिकार बन गया है। अब यह स्थिति बदलनी ही चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह विधेयक किसी पार्टी या सरकार का एजेंडा नहीं है, बल्कि यह देश के न्यायप्रिय नागरिकों की मांग और समय की पुकार है।

लोकसभा में मौजूद सांसदों और समाज के विभिन्न वर्गों में रिजिजू के इस भाषण को व्यापक सराहना मिली। उनकी साफ़गोई, संविधानिक बोध और समावेशी सोच ने इस विधेयक को राजनीतिक विवाद से ऊपर उठाकर एक समाज सुधार की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बना दिया। विपक्ष के कुछ नेताओं ने जहां इसे ‘धार्मिक हस्तक्षेप’ बताने की कोशिश की, वहीं रिजिजू ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ यह साबित किया कि यह कानून अल्पसंख्यकों के विरुद्ध नहीं, बल्कि उनके हित में है, खासकर गरीब मुसलमानों के लिए, जिन तक वक्फ की वास्तविक सहायता कभी नहीं पहुंची।

किरेण रिजिजू का यह भाषण 2 अप्रैल को संसद में दिए गए उन दुर्लभ वक्तव्यों में शामिल हो गया जो केवल विधेयक को पारित करवाने का माध्यम नहीं होते, बल्कि एक राष्ट्र के मूलभूत मूल्यों—न्याय, समानता और पारदर्शिता—को मूर्त रूप देने की प्रेरणा देते हैं। वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 अब केवल एक कानून नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज में विश्वास, ईमानदारी और जवाबदेही की पुनर्स्थापना का माध्यम बन चुका है। यह भाषण भविष्य की उन नीतियों की भी नींव रखता है, जो धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के संतुलित विकास की बात करती हैं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments