14 नवंबर 2024, नई दिल्ली
दिल्ली में एक गरिमामय समारोह में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) द्वारा प्रकाशित पुस्तक “Waqf Bill 2024: Respect to Islam and Gift for Muslims” का औपचारिक विमोचन किया गया। यह किताब वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर केंद्रित है, जो मुस्लिम समाज में न्याय, पारदर्शिता और सामाजिक विकास के लिए नया द्वार खोलती है। इस अवसर पर केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा, “यह किताब न केवल इस्लाम का सम्मान है, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लिए विकास का उपहार है। अल्पसंख्यक कल्याण का एक नया अध्याय आज से शुरू होता है।”
किरण रिजिजू के अलावा किताब का विमोचन अलग अलग कार्यक्रम में वक्फ पर बनी ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के चेयरमैन जगदंबिका पाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क प्रमुख राम लाल, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, हरियाणा के राजपाल बंडारू दत्तात्रेय, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार, पूर्व बीजेपी जनरल सेक्रेटरी संजय जोशी और ज़ ऑल इंडिया इमाम संगठन के चीफ इमाम उमेर इलियासी मौजूद रहे।
किताब की सराहना: “Waqf Bill 2024: Respect to Islam and Gift for Muslims”
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा प्रकाशित इस ऐतिहासिक पुस्तक का विमोचन देश के कई विशिष्ट कार्यक्रमों में हुआ। वक्फ पर लिखी इस पुस्तक को सर्वसम्मति से सराहा गया और इसे मुस्लिम समाज के विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया गया। सभी महानुभावों ने इस किताब की प्रशंसा करते हुए अपने विचार प्रकट किए —
किरण रिजिजू (अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री)– उन्होंने किताब को संविधान और शरीयत के बीच संतुलन बनाने वाला दस्तावेज बताया।
जगदंबिका पाल (JPC चेयरमैन) – उन्होंने कहा कि यह पुस्तक वक्फ सुधारों की दिशा में गंभीर प्रयास है और इसे हर सांसद को पढ़ना चाहिए।
रामलाल (RSS संपर्क प्रमुख) – उन्होंने इसे राष्ट्र निर्माण में मुस्लिम सहभागिता को बल देने वाली प्रेरक पहल कहा।
आरिफ मोहम्मद खान (राज्यपाल, बिहार) – उन्होंने इसे इस्लामी मूल्यों का सम्मान करते हुए न्याय आधारित सुधार का साहसी प्रयास माना।
थावरचंद गहलोत (राज्यपाल, कर्नाटक) – उन्होंने इसे वंचितों और जरूरतमंदों तक वक्फ की वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करने वाली दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
बंडारू दत्तात्रेय (राज्यपाल, हरियाणा) – उन्होंने कहा कि यह पुस्तक धार्मिक संपत्तियों के सदुपयोग और पारदर्शिता का उत्कृष्ट रोडमैप है।
इकबाल सिंह लालपुरा (अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग) – उन्होंने इसे मुस्लिम समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अधिकारों को मज़बूत करने वाला दस्तावेज कहा।
योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश) – उन्होंने कहा कि यह पुस्तक मुस्लिम समाज के उत्थान और राष्ट्रवादी सोच को प्रेरित करने वाला साहित्य है।
इंद्रेश कुमार जी (मार्गदर्शक, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच) – उन्होंने इसे “इस्लाम का आदर करते हुए राष्ट्रहित में मुसलमानों को जागरूक करने वाली क्रांति” कहा।
इमाम उमेर अहमद इलियासी (प्रमुख, ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइज़ेशन) – उन्होंने कहा कि यह किताब वक्फ का सही उपयोग समझने और इस्लामिक भावना के अनुरूप अमल करने वाला प्रकाशपुंज है।
यह पुस्तक न केवल मुस्लिम समुदाय को न्याय, पारदर्शिता और समान अवसर दिलाने की दिशा में एक अनूठा प्रयास है, बल्कि यह *’वक्फ संपत्तियों का जनकल्याण में उपयोग हो’— इस विचार को राष्ट्रीय विमर्श में स्थापित करती है।
यह किताब शाहिद सईद, डॉ. शालिनी अली, डॉ. शाहिद अख्तर और वकील शिराज कुरैशी जैसे प्रमुख सामाजिक चिंतकों और विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई है। इसमें वक्फ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विधिक पहलू, सामाजिक उपयोगिता और सुधार की रूपरेखा को बेहद संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया गया है। लेखक मंडली का उद्देश्य है कि वक्फ संपत्तियों को महज़ धार्मिक परंपराओं तक सीमित न रखते हुए, उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोज़गार जैसी ज़रूरतों में सार्थक रूप से प्रयोग किया जाए।
कार्यक्रम के दौरान किरेन रिजिजू ने पुस्तक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “यह केवल एक किताब नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम समाज के लिए रोडमैप है। इससे वक्फ के ज़रिये असली सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा।” उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की कार्यशैली की भी सराहना की और कहा कि MRM ने देश में मुस्लिम समाज के आत्मविश्वास को पुनः जाग्रत करने का कार्य किया है।
इस किताब का विमोचन ऐसे समय में हुआ है जब वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर देश भर में संवाद चल रहा है। संसद में इसकी बहस और संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों ने यह साबित कर दिया है कि अब वक्फ का उपयोग एक बंद तंत्र नहीं, बल्कि सार्वजनिक कल्याण का प्रभावी साधन बनेगा। MRM की यह किताब इसी विचार को आगे बढ़ाती है और यह बताती है कि कैसे मुस्लिम समाज, विशेषकर युवा और महिलाएं, इन संसाधनों का न्यायपूर्ण लाभ ले सकते हैं।
डॉ. शालिनी अली ने पुस्तक में विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी और वक्फ प्रशासन में उनकी उपस्थिति की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। वहीं डॉ. शाहिद अख्तर ने इसे ‘शोधपरक दस्तावेज़’ बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वक्फ सम्पत्तियों का इस्तेमाल सिर्फ मस्जिदों और दरगाहों के रखरखाव तक सीमित न हो, बल्कि बच्चों की स्कॉलरशिप, हेल्थ क्लीनिक और सामुदायिक विकास में हो।
14 नवंबर 2024 का यह दिन मुस्लिम समाज के लिए एक नई दृष्टि और नयी दिशा का प्रतीक बन गया। “Respect to Islam and Gift for Muslims” महज़ एक किताब नहीं, बल्कि एक सामाजिक दस्तावेज़ है, जो वक्फ की पारदर्शिता, ज़िम्मेदारी और कल्याणकारी उपयोग का प्रतीक बनकर उभरा है। अब देखना यह है कि सरकार, वक्फ बोर्ड और समाज इसे किस स्तर तक क्रियान्वित करते हैं और कितना लाभ समाज के सबसे ज़रूरतमंद वर्गों को पहुँचता है।







