5 जुलाई 2023 को राष्ट्रीय गंगा परिषद के अंतर्गत ₹30,000 करोड़ की परियोजना की शुरुआत हुई। इसमें नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सेप्टिक टैंक, फ्लो-कन्ट्रोल गेट और जीवविज्ञान आधारित सफाई प्रणाली को शामिल किया गया। सभी छह राज्य गठबंधन में शामिल थे, और सार्वजनिक हित, पर्यटन और सुनहरे मंदिरों जैसी धार्मिक स्थलों की सफाई को प्रमुखता दी गई।




